काशी की गंगा में विदेशी मछली देख वैज्ञानिक भी हैरान, छोटी मछलियों के लिए खतरा

Smart News Team, Last updated: Sat, 26th Sep 2020, 5:00 PM IST
  • वाराणसी के रमना गांव के पास मछुआरों के जाल में एक विचित्र सी मछली फंस गई. बाद में पता चला ये अमेरीका के अमेजन नदी में पाई जाने वाली सकरमाउथ फिश है. इसे गंगा की पारिस्थितिकी के साथ ही मछली में किसी तरह का खाद्य और औषधीय गुण न होने के कारण इसे मछुआरों की दृष्टि से भी बेहद खराब माना जाता है.
गंगा में मिली विदेशी प्रजाति की मछली

वाराणसी: शहर में गंगा नदी में विदेशी प्रजाति की मछली मिलने से लोगों में हैरानी है. शनिवार को अमेरिका की अमेजन नदी में पाई जाने वाली कैटफिश की एक और प्रजाति काशी की गंगा में मिली है. सकरमाउथ कैटफिश नामक इस मछली के गंगा में मिलने से बीएचयू के जंतु विज्ञानी बेहद चिंता में हैं. 

जानकारी के मुताबिक यह एक महीने के भीतर यह दूसरा मौका है जब गंगा में कैटफिश पाई गई है. बीते 24 सितंबर को काशी के दक्षिण में रमना गांव के पास गंगा में मछली पकड़ने गए मछुआरों के महाजाल में यह मछली फंस गई. इस अजीबो गरीब मछली को देख कर मछुआरों ने इसकी सूचना गंगा प्रहरी दर्शन निशाद को दी. जिसके बाद देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षित दर्शन निशाद इसे देखते ही पहचान गए. उन्होंने उसे जीवित अवस्था में बीएचयू के जंतु विज्ञानियों तक पहुंचाया. इसके बारे में बीएचयू के जंतु विज्ञानी प्रो. बेचन लाल ने बताया कि सकरमाउथ कैटफिश नाम की मछली जलीय पारिस्थितिकी में भयानक असंतुलन पैदा कर सकती है. यह अपने से छोटी मछलियों ही नहीं बल्कि अन्य जलीय जीवों को भी खा जाती हैं.देसी मछलियों को प्रजनन के लिए विशेष परिस्थिति की जरूरत होती है, लेकिन इनके साथ ऐसा नहीं है. ये मछलियां जल में किसी भी परिस्थिति में और कहीं भी प्रजनन कर सकती हैं.

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इसके साथ ही प्रो. लाल ने बताया कि चिंता की बात तो यह है कि यह मछली देश की लगभग सभी नदियों में पाई जाने लगी है. ये मांसाहारी प्रवृत्ति की होती हैं. ये मछलियां आकार में दो इंच से सवा फिट तक की होती हैं, लेकिन इनमें न खाद्य गुणवत्ता है और न ही इनमें किसी प्रकार का औषधीय गुण है. दोनों ही दृष्टि से बेकार होने के कारण यह मछलियां मछुआरों की आजीविका के लिए भी मुसीबत पैदा कर रही हैं. उन्होंने बताया कि इन मछलियों को नदियों से समाप्त करना अब असंभव हो गया है. इस मछली की फोटो और वीडियो देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की मछली विशेषज्ञ डॉ. रुचि बडोला को भी भेज दी गई है. 

 

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