माचिस के डिब्बे में समा गई 6 गज की साड़ी, जमकर हो रही कारीगरों की तारीफ

Atul Gupta, Last updated: Wed, 12th Jan 2022, 5:49 PM IST
  • साड़ियां तो आपने एक से बढ़कर एक देखी होगी लेकिन क्या कभी कोई ऐसी साड़ी देखी है जो माचिस के डिब्बे में समा सकती हो? बच्चों के खेलने वाली साड़ी नहीं बल्कि महिलाओं की 6 गज लंबी साड़ी माचिस के डिब्बे में समा गई है.
माचिस के डिब्बे में साड़ी (फोटो- सोशल मीडिया)

वाराणसी: दुनिया में सबसे बेहतरीन साड़ियों की बात की जाए तो बनारसी साड़ी का जिक्र जरूर आता है. अपने खूबसूरत डिजाइन के लिए बनारसी साड़ी दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन क्या आपको पता है कि साउथ इंडिया जिसे हम दक्षिण भारत कहते हैं वहां भी एक से बढ़कर एक साड़ियां मिलती हैं? कांजीवरम और सिल्क साड़ी उन्हीं में से एक है जिसकी दुनियाभर में मांग है. आज हम आपको एक ऐसी ही सिल्क की साड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो माचिस की डिब्बे में समा सकती है. ये साड़ी बनाई है हैदराबाद के सिरसिला जिले के नल्ला विजय ने जो काफी तेजी से डिमांड में आ रही है. तेलंगना के मुख्यमंत्री केटी रामा राव समेत कई मंत्रियों को ये साड़ी दिखाई गई.

सीएम राव ने कारीगरों का तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सुना था कि साड़ी माचिस के डिब्बे में समा सकती है लेकिन कभी देखा नहीं था सो पहली बार देख भी लिया. सीएम ने कारीगरों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है. कारीगरों ने सबीता इंदिरा रेड्डी को साड़ी गिफ्ट की. जानकारी के मुताबिक ये साड़ी बनने और माचिस की डिब्बी में पैक होने के लिए 6 दिन का समय लगता है. कारीगरों के मुताबिक मशीन से इस साड़ी को बनाने में 8 हजार रूपये लगते हैं जबकि हाथ से बनाने में 12 हजार रूपये की लागत आती है.

गौरतलब है कि साल 2015 में जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा भारत के दौरे पर आए थे तो उस दौरान भी उन्हें ऐसी ही सुपर फाइन सिल्क की साड़ी गिफ्ट की गई थी. भारत में साड़ियों का लंबा इतिहास रहा है. सदियों से भारत में साड़ी पहनने का चलन रहा है. भारत के हर कोने में अलग-अलग तरह की साड़ियां पहनने का चलन है. इनमें सिल्क की साड़ी एक ऐसी साड़ी है जो ना सिर्फ पूरे देश में बल्कि पूरी दुनिया में पसंद की जाती है.

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