St. Thomas Day 2021: प्रभु यीशु के शिष्य का इतिहास सेंट थामस चर्च से है जुड़ा

Smart News Team, Last updated: Thu, 1st Jul 2021, 6:39 PM IST
  • सेंट थामस जो प्रभु यीशु मसीहा के चुनिंदा शिष्य में से एक थे. वो बनारस पहली सदी के शुरुआत में आए थे. यहां आकर गंगा किनारे एक मैदान में सेंट थामस ने प्रभु यीशु की आराधना की थी.
सेंट थामस चर्च (केरल)

बनारस में गोदैलिया जाने के दौरान एक गिरजाघर पड़ता है जो काफी प्रसिद्ध है, इसके पीछे की एक कहानी है. दरअसल सेंट थॉमस गिरजाघर के इतिहास पर गौर करें तो बहुत ही पुराना है, जो जुड़ा हुआ है प्रभु यीशु के शिष्य से. ऐसा कहा जाता है कि पहली सदी में प्रभु यीशु के एक शिष्य सेंट थमस बनारस आए थे. साथ ही उन्होंने गंगा किनारे मैदान में प्रभु यीशु की भी आराधना की. उनके सफरनामे में जिस स्थान को उन्होंने ब्लेस्ड किया था, उसका जिक्र भी किया गया है. किसी ब्रिटिश सैनिक के हाथ 17वीं शताब्दी में वो पत्र लग गया था. उसमें जो नक्शा दर्ज था उसी के अनुसार ईसाई मिशनरी ने उस स्थान पर गिरजाघर का निर्माण करवा दिया. 

जिसे सेंट थामस के नाम से जाना जाता है. ये भी माना जाता है कि सेंट थामस की मेहनत के कारण ही भारत के लोगों ने शुरुआती दौर में प्रभु यीशु के उपदेश और उनके बारे में जाना.किवदंती के अनुसार 12 शिष्य थे प्रभु यीशु के, जो धर्म प्रचार करने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में निकल गए थे. सेंट थामस भी इनमे से ही एक थे. जब वो समुद्र के रास्ते से धर्म प्रचार के लिए ए तो मद्रास के तट पर ही उनकी नौका लगी थी. जिसके बाद उन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार वहां रहकर शुरू कर दिया.

 उनकी मेहनत रंग लाई और ईसाई धर्मा का प्रभाव भी बढ़ा, हालांकि कुछ प्रभावशाली लोगों को ये  नागवार गुजरा. ऐसे में वो लोग सेंट थामस के खिलाफ हो गए. साथ ही उन पर तरह-तरह का जुल्म करना शुरू कर दिया था. ये विवाद इतना बढ़ गया कि एक दिन सेंट थामस का कत्ल कर दिया गया. सेंट थामस गिरजाघर के पादरी न्यूटन स्टीवंस का कहना है कि सेंट थामस निधन से पहले बनारस आए थे. उनके सम्मान में ईसाई मिशनरी ने ये गिरजाघर बनवाया.

 

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