सोशल डिस्टेंसिंग का जादू एड्स रोग हुआ काबू इस साल 63 फ़ीसदी कब मिले रोगी

Smart News Team, Last updated: 02/12/2020 01:09 AM IST
  • कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोशल डिस्टेंसिंग का फॉर्मूले का कमाल ही कहेंगे कि पिछले वर्षों की तुलना में इस साल एड्स रोगियों की संख्या में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े तो इसी ओर इशारा करते नजर आ रहे हैं.
सोशल डिस्टन्सिंग से पड़ा एड्स के आंकड़ों पर असर

वाराणसी. वाराणसी में 1 दिसंबर यानी विश्व एड्स दिवस पर वाराणसी जिले की स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है. जिसमें पिछले वर्षों की तुलना में इस साल 63.10 फ़ीसदी रोगियों की संख्या कम बताई गई है. वाराणसी जिले के एड्स रोग नियंत्रण विभाग की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में दर्शाए गए आंकड़ों की बात करें तो साल 2017 में 1095, 2018 में 1093 तथा साल 2019 में 1103 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे. वही साल 2020 के मार्च माह से देश में फैली वैश्विक स्तर की कोरोना महामारी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जारी की गई मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन का ही असर कहेंगे कि इस साल 30 नवंबर तक वाराणसी जनपद में कुल 407 लोगों में ही एचआईवी पॉजिटिव के लक्षणों की पुष्टि हुई है.

वही पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कैंपस के हॉस्पिटल के एआरटी सेंटर में 8067 एचआईवी पॉजिटिव मरीज अपना इलाज करा रहे हैं. जिला एचआईवी एड्स नियंत्रण एवं क्षय रोग अधिकारी डॉ राकेश कुमार सिंह बताते हैं कि साल 2018 एचआईवी एड्स रोगियों के लिए सबसे कठिन रहा है. बताते हैं कि साल 2018 में दुनिया भर में कुल 3.7 करोड़ से अधिक लोग एचआईवी पॉजिटिव मिले थे जिनमें लगभग 1100000 मरीजों की मौत हो गई थी जबकि भारत में इसी साल 2100000 लोग एचआईवी एड्स रोग से पीड़ित हुए थे जिनमें 85000 लोग काल के गाल में समा गए थे. 

PM मोदी ने पावन पथ वेबसाइट की लांच, काशी के पौराणिक मंदिरों की कराएगी यात्रा

डॉक्टर सिंह बताते हैं कि एड्स से बचने का एकमात्र उपाय जागरूकता ही है. चिकित्सा जगत में अभी भी एड्स रोग लाइलाज ही है. आमजन में जागरूकता के साथ ही सजगता बढ़ाने के उद्देश्य से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1 दिसंबर को एड्स दिवस के रूप में मनाते हैं. उन्होंने बताया कि जिले में एड्स की जांच निशुल्क होती है.

बताया कि जिले के आठ आईसीटीसी और दो पीपीटीसीटी सेंटरों पर जांच के साथ ही निशुल्क उपचार व दवाओं की सुविधा भी उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में एचआईवी संक्रमण के लक्षण प्रकट होते हैं तो वह 72 घंटे के भीतर एआरटी सेंटर पर संपर्क कर पीईपी दवा की पहली डोज लेकर बचाव की दिशा में चलना प्रारंभ कर देगा. उस व्यक्ति को यह दवा लगातार 28 दिन लेनी पड़ेगी.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें