शुल्क मद का पता नहीं फिर भी मांगी जा रही फीस

Smart News Team, Last updated: 09/12/2020 11:16 PM IST
  • जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति पाई टीचरों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन का कार्य अधर में लटका हुआ है. संबंधित विश्वविद्यालयों की ओर से जहां सत्यापन के लिए शुल्क की मांग की जा रही है वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शुल्क का मद न होने के कारण विषम स्थिति बन गई है.
फाइल फोटो

वाराणसी. बता दें कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड उत्तर प्रदेश के द्वारा वाराणसी जनपद के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में टीचरों की नियुक्ति की गई थी. जैसा कि माध्यमिक बोर्ड का प्रावधान है कि नियुक्ति पाई टीचरों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन करना अनिवार्य है. इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के पसीने छूट रहे हैं. इसका कारण नियुक्त हुए टीचरों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से संबंधित विश्वविद्यालयों की ओर से सत्यापन शुल्क की मांग करना है. शुल्क जमा किए बगैर विश्वविद्यालयों ने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने से इनकार कर दिया है.

 ऐसी सूरत में डीआईओएस कार्यालय में उहापोह की स्थिति बन गई है. जबकि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर शिक्षा निदेशक डॉ महेंद्र देव ने राज्य के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया है कि नियुक्त हुए टीचरों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के कार्य में कृषि प्रकार की लापरवाही न की जाए. शिथिलता बरतने वाले संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए. प्राथमिकता के आधार पर टीचरों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाए. अपर शिक्षा निदेशक ने अब तक टीचरों के हुए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन संबंधी रिपोर्ट भी मांगी है.

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इस संबंध में संयुक्त शिक्षा निदेशक अजय कुमार द्विवेदी बताते हैं कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सत्यापन कार्य के लिए सत्यापन शुल्क का मद नहीं है जबकि टीचरों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए विश्वविद्यालयों की ओर से 500 से लेकर 3000 तक की शुल्क जमा कराई जा रही है. ऐसी सूरत में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कार्य अधर में लटक गया है. उन्होंने बताया कि वाराणसी जिले में 137 राजकीय शासकीय माध्यमिक विद्यालय हैं. जिनमें 1400 टीचर कार्यरत हैं. इन टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अलावा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, सहित अन्य विश्वविद्यालयों के शैक्षिक प्रमाण पत्र हैं. 

इन विश्वविद्यालयों को कार्यरत टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु उपलब्ध करा दिए गए हैं किंतु बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अलावा अब तक किसी भी विश्वविद्यालय ने सत्यापन की रिपोर्ट प्राप्त नहीं कराई है जिसका प्रमुख कारण शुल्क न जमा कराना है. स्थिति विकट है, जिला विद्यालय निरीक्षकों के सामने पेश आ रही इस स्थिति को माध्यमिक बोर्ड के साथ ही शासन को भी लिखित तौर पर अवगत करा दिया गया है. जल्द ही इस को लेकर शासन की ओर से ठोस निर्णय लिए जाने की संभावना है.

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