यूपी बोर्ड परीक्षा 2021- मानक के अनुसार दिए जाएंगे अंक तब बन पाएंगे केंद्र

Smart News Team, Last updated: 02/12/2020 03:20 PM IST
  • वित्तविहीन विद्यालयों को को इस बार विद्यार्थियों की मेरिट के आधार पर केंद्र बनाया जाएगा. वर्ष 2020 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा का परिणाम 90 फीसद से अधिक होने पर ही वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्रों की सूची में शामिल किया जाएगा.
वर्ष 2021 के यूपी बोर्ड की परीक्षा की तैयारी में केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया भी आनलाइन शुरू

वाराणसी. वर्ष 2021 के यूपी बोर्ड की परीक्षा की तैयारी में केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया भी आनलाइन शुरू कर दी गई है.इसको लेकर शासन ने केंद्र बनाए जाने वाले विद्यालयों में मानकों के आधार पर अंक तय कर दिए हैं. मानक के अनुसार अंकों की दौड़ में आगे निकलने वाले विद्यालय ही केंद्र बन पाएंगे. मुख्य बात इसमें यह है कि मानकों में पिछले सत्र वर्ष 2020 की परीक्षा में प्रदर्शन करने को भी मानक बनाया गया है. बोर्ड द्वारा पहली प्राथमिकता राजकीय व अशासकीय विद्यालयों को केंद्र बनाना है. वहीं वित्तविहीन विद्यालयों को को इस बार विद्यार्थियों की मेरिट के आधार पर केंद्र बनाया जाएगा. वर्ष 2020 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा का परिणाम 90 फीसद से अधिक होने पर ही वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्रों की सूची में शामिल किया जाएगा. रिजल्ट के आधार पर 20 अंक निर्धारित किये गए हैं.

बोर्ड ने केंद्र के निर्धारण के लिए विभिन्न मानकों पर अलग-अलग अंक भी निर्धारित किए गए हैं. जैसे यदि हाईस्कूल स्तर का विद्यालय है तो 10 अंक व इंटर तक के विद्यालय पर 20 अंक तय है.इसी प्रकार सीसी टीवी कैमरा पर 10 अंक, कैमरे के निगरानी पर 10 अंक दिए जाएंगे.

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अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला द्वारा दिए गए निर्देश में केंद्रों के निर्धारण के लिए विद्यालयों में वायस रिकार्डर सीसीटीवी कैमरा व रिकार्डिंग के लिए डीवीआर के साथ राऊटर डिवाइस एवं हाई स्पीड इण्टरनेट कनेक्शन लगा होना बहुत ज़रूरी है. वहीं कोविड को देखते हुए दोनों पालियों की परीक्षा में जरूरी शारीरिक दूरी के अनुसार परीक्षार्थियों की बैठने की पर्याप्त कक्ष होना भी अनिवार्य है.

मानक पर पर खरे उतरने वाले विद्यालयों को ही केंद्र बनाया जाएगा. केंद्रों का निर्धारण आनलाइन साफ्टवेयर के माध्यम से सीधे बोर्ड करेगा. छात्रों की सुविधा को देखते हुए विद्यालयों के दस किमी के दायरे में ही परीक्षा केंद्र बनाएं जाएंगे. दो विद्यालयों के मध्य दूरी के निर्धारित करने के लिए प्रधानाचार्यों को स्मार्ट फोन के माध्यम से स्वयं मैपिंग भी करनी होगी. अपलोड की गयी आधारभूत सुविधाओं, दो विद्यालयों के बीच की दूरी, परीक्षार्थियों की बैठने की क्षमता का भौतिक सत्यापन डीएम द्वारा गठित समिति द्वारा किया जाएगा.

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