बीएचयू के एक्स स्टूडेंट की शोध से खुलासा, हमेशा चमकते हैं वैंपायर सितारे

Smart News Team, Last updated: Thu, 5th Aug 2021, 12:41 AM IST
  • क्या आपको पता है की आकाश में टिमटिमाने वाले सामान्य तारों का जीवनकाल निश्चित होता है. लेकिन अंतरिक्ष में कुछ ऐसे भी तारे हैं जो अनादि काल से चमकते आ रहे हैं और जब तक यह ब्रह्मांड है तब तक ऐसे ही चमकते रहेंगे. एस्ट्रोलॉजी की भाषा में इन तारों को वैंपायर यानी अमर यानी चिरंजीवी तारे कहा जाता है.
अंतरिक्ष में कुछ ऐसे भी तारे हैं जो अनादि काल से चमकते आ रहे हैं

वाराणसी: बता दें कि नामचीन अमेरिकन एस्ट्रोनामर एलेन सेंडिज ने साल 1953 में शोध कर यह सिद्धांत रखा था कि जब तक ब्रह्मांड है तब तक वैंपायर तारों का अस्तित्व है. लेकिन एलेन सैंडिज का यह सिद्धांत केवल थ्योरी तक ही सीमित रह गया था. अब तक उनके इस सिद्धांत को प्रमाणित नहीं किया जा सका था. लेकिन बीएचयू के एक्स स्टूडेंट युवा खगोल वैज्ञानिक गौरव सिंह ने पहली बार इसरो की ओर से छोड़े गए एस्ट्रोसेट सेटेलाइट के अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद वैंपायर तारों का प्रत्यक्ष प्रमाण दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है.

युवा खगोल वैज्ञानिक गौरव सिंह की ओर से किए गए शोध में बताया गया है कि यह एंपायर तारे अपने क्लस्टर समूह के रेड जायंट यानी कि जिन तारों का जीवनकाल समाप्त हो रहा है यानी ऐसे तारे जो टूटने की कगार पर हैं उन तारों से द्रव्यमान ग्रहण कर अनंत काल तक अंतरिक्ष में टिमटिमाते रहते हैं. गौरव सिंह ने यह भी सिद्ध किया है कि ब्रह्मांड में अधिकतर तारों का एक निश्चित जीवनकाल होता है, अपना समय पूरा करने के बाद उन तारों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है जबकि सूर्य की तरह तमाम रेड जायंट तारे अनंत काल तक चमकते रहते हैं.

शोध के दौरान गौरव सिंह ने क्लस्टर में एक अति दुर्लभ वायनरी देखी,जिसमें पाया गया कि ब्रह्मांड के एक गोलाकार क्लस्टर समूह में एक एक्सट्रीम होरिजेंटल ब्रांच तारा अपने पास के बुजुर्ग तारों से लगातार ऊर्जा या हाइड्रोजन गैस कर रहा है, जिससे उस बुजुर्ग तारे की तेजी से मौत हो जाती है आम भाषा में इसका नाम वैंपायर तारा रखा गया है. गौरव सिंह की इस शोध को अंतरिक्ष विज्ञान की प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकी जनरल एस्ट्रोफिजिक्स ने 10 दिसंबर के अंक में से प्रकाशित किया है.

अपनी इस उपलब्धि पर गौरव सिंह बताते हैं कि उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान से स्नातक और पीजी करने के बाद नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट में शोध कार्य कर रहे हैं. गौरव सिंह ने बताया कि उनकी इस शोध का काफी हिस्सा टेलीस्कोप और अन्य भौतिकी उपकरणों के साथ बनारस स्थित अपने आवास पर ही रहकर पूरा किया है. गौरव सिंह को इस शोध कार्य में इसरो के एस्ट्रो सेट सैटेलाइट समेत आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के खगोल वैज्ञानिक डॉ रमाकांत यादव के अलावा आईआईए बेंगलुरु की डॉ. स्नेह लता साहू और डॉक्टर अन्नपूर्णनी सुब्रमण्यम ने सहायता की है.

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