देश में पहली बार शुरू करेगा सांस्कृतिक अर्थशास्त्र काका पीजी कोर्स

Smart News Team, Last updated: Thu, 5th Aug 2021, 7:29 AM IST
  • देश में पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सांस्कृतिक अर्थशास्त्र पर 2 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स शुरू करने जा रहा है. इस कोष के माध्यम से प्रो पुअर टूरिज्म अवधारणा की देश में शुरुआत होगी.
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सांस्कृतिक अर्थशास्त्र पर 2 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स शुरू करने जा रहा है

वाराणसी: बता दें कि इंडोलॉजी यानी भारत की प्राचीन विद्याओं जैसे वेद वेदांत सांख्य शास्त्र दर्शन राजनीतिक दर्शन कौटिल्य व मौर्य काल की अर्थी और राजनीतिक दर्शन जैसी पुरातन विद्या को एकेडमिक विषयों के रूप में भारत में अभी तक शामिल नहीं किया जा सका है. लेकिन अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने इसको लेकर पहल शुरू कर दी है. इस क्रम में बीएचयू सांस्कृतिक अर्थशास्त्र पर 2 वर्षीय स्नातकोत्तर कोर्स शुरू कर रहा है.

अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू होने वाले इस कोर्स में भारत की कला संस्कृति वैदिक व आध्यात्मिक ग्रंथों के अलावा गौरवशाली धरोहर मूर्त अमूर्त विरासत लोक कला प्राचीन कला कृतियां वास्तुकला लोक साहित्य और वैदिक विज्ञान आदि क्षेत्रों के ज्ञान को उद्योग से जोड़कर अर्थशास्त्र पर अध्ययन शोध और अनुसंधान किया जाएगा.

इस संबंध में कोर्स की प्रस्तावक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मनीषा आशीष मेहरोत्रा ने बताया कि जल्द ही अर्थशास्त्र विभाग इस कोर्स का प्रस्ताव बनाकर बीएचयू के इस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंट के सम्मुख प्रस्तुत करेगा. बाद इसके एकेडमिक काउंसिल और कार्यकारी परिषद की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी. उन्होंने बताया कि इससे पहले ऑक्सफोर्ड वहा वर्ड विश्वविद्यालय समेत नीदरलैंड के रॉटरडम जैसे विश्व के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में ही सांस्कृतिक अर्थशास्त्र को एकेडमिक रूप देकर स्टडी कराई जा रही है.

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