वाराणसी: ठंड आयी तो प्रसिद्ध मलइयो मिठाई की बढ़ी डिमांड

Smart News Team, Last updated: 12/12/2020 11:21 PM IST
  • सर्दियों में केवल तीन महीने ही यह मिठाई रामबाण की तरह पसंद की जाती है. जितनी ज्यादा ओस उतनी ज्यादा गुणवत्ता जिस वजह से इसके शौकीन स्थानीय ही नहीं बल्कि देश व विदेश के पर्यटक भी हैं.
फाइल फोटो

वाराणसी . मौसम बदल चुका है अब ठंड और कोहरे की शुरुआत हो गयी है.कहते हैं कि गर्मी की अपेक्षा सर्दी में खाना ज़्यादा खा लिया जाता है तो ऐसे में सर्दी के में खाने वाले व्यंजन भी बदल जाते हैं और शौकीन लोग ऐसे मौके को कतई नहीं गंवाना चाहते हैं. सर्दी के मौके पर काशी की प्रसिद्ध मिठाइयों में शामिल मलइयो का भी अलग ही रुतबा है. दरअसल जब ठंड के मौसम में जब घन घोर कोहरा पड़ता है और ठंड बढ़ती है तब ही यह बनना शुरू होता है. सर्दियों में केवल तीन महीने ही यह मिठाई रामबाण की तरह पसंद की जाती है।जितनी ज्यादा ओस उतनी ज्यादा गुणवत्ता जिस वजह से इसके शौकीन स्थानीय ही नहीं बल्कि देश व विदेश के पर्यटक भी हैं.जैसे जैसे कोहरे की समाप्ति होती है मलइयो भी गायब होती जाती है.

सर्दी के मौसम में मलइयो काशी की प्रसिद्ध मिठाई है. मलइयो के जानकारों के अनुसार इसको बनाने में रात को ओस में दूध रखा जाता है. फिर असल कारीगरी इसकी फेटाई होती है.जितना ज़्यादा दूध फेटा जाता है, मलइयो का स्वाद उतना ही बढ़ता जाता है. उसके बाद इसे बादाम गिरी, पिस्ता गिरी से सजा कर ग्राहकों को परोसा जाता है. इसके शौकीन कुछ लोग इसे खाते हैं, तो कुछ लोग इसे पीते है. इसके बारे में मशहूर यह है कि कुछ लोग कहते है कि कब खाया कब पिया पता ही नहीं चला. यह मिठाई सबसे अधिक गंगा किनारे बसे मुहल्लों में बिकती है. शहर के चौक, गोदौलिया, चौखंभा क्षेत्र में मलइयो की तमाम दुकानें मौजूद हैं.

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सर्दी शुरू होते ही इन दुकानों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी है. बिक्री सुबह से शुरू होती है और दोपहर तक सारा स्टॉक खत्म फिर इसके लिए लोगों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है. लोग खा भी रहे हैं और घर के लिए पैक भी करवा के ले जा रहे हैं. मलइयो के शौकीन लोग कई किलोमीटर का सफर तय करके इसका स्वाद चखने के लिए काशी के पक्के महाल आते हैं.

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