वाराणसी : कभी सीमाओं की बंधन में नहीं बंधे मशहूर शायर एवं फिल्मकार कैफी आज़मी

Smart News Team, Last updated: Thu, 14th Jan 2021, 2:48 PM IST
  • देश के मशहूर शायर एवं फिल्मकार कैफ़ी आज़मी कभी भी एक दायरे में बंधकर नहीं रहे. मौसिकी के साथ फिल्मों में अपनी काबिलियत को प्रमाणित करने वाले शायर कैफ़ी आज़मी की पहचान समाज सेवा के क्षेत्र में भी काफी प्रचलित है. 
कभी सीमाओं की बंधन में नहीं बंधे मशहूर शायर एवं फिल्मकार कैफी आज़मी

वाराणसी : मशहूर शायर एवं फिल्म गीतकार कैफ़ी आज़मी का जन्म दिवस का मौका है तो उनके जीवन से जुड़े स्मृतियों को याद किया गया. कैफ़ी आज़मी के जीवन के बेहद करीब रहे 78 वर्षीय टीचर नेता कामरेड हरमिंदर पांडे बताते हैं कि तत्कालीन रेल मंत्री सीके जाफर शरीफ से मऊ आजमगढ़ शाहगंज बड़ी रेल लाइन की मंजूर कराई.

कामरेड हरमिंदर पांडे ने बताया कि 2 फरवरी 1993 में रेल आंदोलन के दौरान कैफी आज़मी साहब ने रेल रोको आंदोलन का आवाहन किया. इस आंदोलन में सैफी साहब व्हीलचेयर पर खुरासन रोड रेलवे स्टेशन और हम हरिहर रेलवे स्टेशन पर नेतृत्व कर रहे थे. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दी जिसमें कई लोग घायल हुए थे. कम रेट बताते हैं कि इस लाठीचार्ज में हमें भी चोट लगी थी. जिला अस्पताल में रफी साहब हमारा हाल-चाल लेने के लिए काफी देर तक साथ में बैठे रहे.

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कामरेड हरविंदर पांडे ने बताया कि जिले में हवाई पट्टी की स्थापना की जड़ में कैफी आज़मी साहब की महती भूमिका रही है.बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में तत्कालीन उड्डयन राज्यमंत्री तस्लीमुद्दीन मुबारकपुर में आई थी.रेलवे आंदोलन के दौरान कैफी आजमी ने उड्डयन राज्यमंत्री से मुलाकात की थी और हवाई पट्टी विकसित करने का प्रस्ताव रखा था.

 

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