वाराणसी में टैंपल सर्वे टीम जुटा रही प्राचीन मंदिरों के इतिहास का लेखा-जोखा

Smart News Team, Last updated: 06/09/2020 12:38 PM IST
  • वाराणसी में ऑर्कोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की भोपाल से आई तीन सदस्यीय पुरातत्त्वविदों की टीम काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राचीन देवालयों का लेखा-जोखा ले रही है. इसी टीम ने अयोध्या राम मंदिर पुरातत्त्वविक खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
वाराणसी के प्राचीन मंदिरों का दस्तावेजीकरण होगा.

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी प्राचीन देवालयों का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. इसके लिए पुरातत्वविदों की तीन सदस्यीय टीम भोपाल से बनारस पहुंच चुकी है. पहले चरण में कॉरिडोर परिक्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिरों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए भोपाल से आए यह पुरातत्त्वविद मंदिरों की बनावट के साथ-साथ इनमें स्थापित सभी विग्रहों की प्राचीनता, उनको बनाने में प्रयोग किए गए पत्थरों के प्रकार, विग्रहों के अलंकरण और विग्रह की निर्माण शैली आदि के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.

इस समय कॉरिडोर परिसर में करीब एक दर्जन प्राचीन मंदिर अपने मूल रूप में विद्यमान हैं. इन मंदिरों का लेखा-जोखा हो जाने के बाद एएसआई भोपाल की टीम उन विग्रहों की पड़ताल करेगी जिसे कि निर्माण कार्य में हो रही असुविधा के कारण अस्थाई रूप से हटाया गया है. परिसर से हटाए गए देव विग्रह एक स्थान पर सुरक्षित रखे गए हैं.  

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एएसआई भोपाल कार्यालय के सूत्रों के अनुसार यह टीम करीब 15 दिन तक बनारस में रहेगी. यह तीन सदस्यीय टीम ऑर्कोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की विशेष टैंपल सर्वे सेक्शन से संबंध रखती है, यह मंदिरों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए जानी जाती है. इन्होंने ने ही अयोध्या में श्रीराम मंदिर की पुरातात्विक खोज में भी अहम भूमिका निभाई थी. 

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काशी के छप्पन विनायक मंदिरों में से आठ प्रमुख विनायक मंदिर भी हैं. इनमें जौ विनायक, त्रिसंध्य विनायक, भगीरथ विनायक, दुर्मुख विनायक, सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक, गणनाथ विनायक प्रमुख हैं. इसके अतिरिक्त नीलकंठ महादेव, चंद्रेश्वर महादेव, सप्त सरस्वती, मानधातेश्वर महादेव, अमृतेश्वर महादेव, दंडपाणि भैरव, मारकंडेय महादेव, पांच पांडव महादेव, कोनेश्वर महादेव, गंगा मंदिर, कैलाशेश्वर महादेव, ब्रह्मेश्वर महादेव, चंडी चंडेश्वर महादेव, शुक्रेश्वर महादेव, त्रिमूर्ति महादेव, महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर का हिस्सा हैं. इनके अलावा हनुमान जी के पांच मंदिर भी हैं. 

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