वाराणसी: अब नहीं मजबूरी, खेती से भी आमदनी पूरी

Smart News Team, Last updated: Fri, 6th Aug 2021, 2:44 PM IST
  • मजबूरी में खेती करना अब गुजरे जमाने की बात हो गई है, शिक्षा और टेक्नोलॉजी के युग में अब खेती भी बेहतर आमदनी का अच्छा व्यवसाय के रूप में उभर कर सामने आ रहा है. आजकल के पढ़े लिखे किसान खेती करने की नई तकनीक अपनाकर बड़े से बड़े नौकरी पेशा वाले व्यक्ति को पीछे छोड़ रहे हैं.
शिक्षा और टेक्नोलॉजी के युग में अब खेती भी बेहतर आमदनी

वाराणसी. जी हां, यह बिल्कुल सही है, अब प्रवीण को ही ले लीजिए, रांची के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान से परास्नातक की डिग्री हासिल कर प्रवीण भी किसी जगह बेहतर नौकरी पा सकते थे किंतु नौकरी को ठोकर मार कर प्रवीण ने अपनी शिक्षा के अनुरूप कृषि का व्यवसाय करना शुरू किया. समय-समय पर नई-नई तकनीकों को अपनाकर आज काशी के बड़ागांव ब्लॉक के बेलारी गांव के रहने वाले प्रवीण श्रीवास्तव की गिनती प्रगतिशील किसानों में की जाती है. किसानों का मुख्य बैंक नाबार्ड से सहयोग लेकर आज उनकी खेती किसानी चमक रही है. प्रवीण ने खुद को ही नहीं बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को भी नई तकनीक अपनाकर खेती करने के लिए प्रेरित भी किया है. इतना ही नहीं किसान प्रवीण ने क्षेत्र के तकरीबन 300 किसानों को जोड़कर फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन यानी एफपीओ एवं काशी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी भी बना डाली है.

शुरुआत में इस कंपनी को खड़ा करने के लिए प्रवीण ने 10 बेड से वर्मी कंपोस्ट जैसी जैविक खाद को तैयार कर आज अपनी मेहनत से 50 दिन तक पहुंचा दिया है. प्रवीण हर साल 12 सौ कुंतल वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से सब्जी व अन्य अनाजों की खेती कर साल में 10 लाख से अधिक की आमदनी रहे हैं. गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर प्रवीण ने बीएचयू के दुग्ध एवं पशुपालन विभाग से परास्नातक की डिग्री प्राप्त की. अच्छी कंपनियों में 10 साल तक प्रवीण ने नौकरी भी की किंतु नौकरी में प्रवीण का मन ना लगा उन्होंने अपनी शिक्षा के अनुसार खेती को ही अपनी आमदनी का जरिया बनाने का निर्णय लिया.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने नाबार्ड के सहयोग से किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने एवं कृषि में आधुनिक तकनीकी अपनाने के लिए एग्री क्लीनिक एग्रीबिजनेस कार्यक्रम की शुरुआत की. इसे प्रवीण का सौभाग्य ही कहेंगे शिक्षित प्रवीण ने इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण लिया और विजया बैंक से 2000000 रुपए का कर्ज लेकर अपने क्षेत्र में एग्री क्लीनिक एग्री बिजनेस सेंटर की स्थापना की. इस सेंटर से प्रवीण ने किसानों को खाद बीज एवं कीटनाशक दवाइयां बेचने का व्यापार शुरू कराया. इसके साथ ही प्रवीण ने किसानों की पाठशाला की भी शुरुआत की. आज स्थिति यह है कि प्रवीण साल भर में 12 सौ कुंतल वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद तैयार कर रहे हैं और उन्हें किसानों को बेच रहे हैं. उनकी ओर से की जा रही खेती की आमदनी को छोड़ दिया जाए तो प्रवीण आज वर्मी कंपोस्ट तैयार कर किसानों को बिक्री करने के व्यवसाय में साल भर में 10 लाख रुपए तक की आमदनी कर रहे हैं.

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