वाराणसी: समय के साथ और गाढ़ा हुआ काशी पर धार्मिक रंग

Smart News Team, Last updated: 19/10/2020 02:34 PM IST
  • भगवान शिव द्वारा बनाई गई काशी नगरी पर समय के साथ धार्मिक रंग और गाढ़ा होता जा रहा है. प्राचीन काशी धाम के रूप में विख्यात वाराणसी महानगर आधुनिकता का चोला पहन कर खिला-खिला सा नजर आने लगा है.
गंगा किनारे पर बसी काशी धाम का धार्मिक रंग हुआ तेज़

वाराणसी. धर्म, संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को सदियों से अपने में समेटे वाराणसी शहर आज समय के साथ अपने को बदल रहा है. बदलाव के इस नए दौर में भी यहां के लोगों मैं धार्मिकता सामाजिकता और मानव प्रेम के साथ पौराणिक धरोहरों को न केवल सहेजने बल्कि उन्हें और अधिक विकसित करने की क्षमता समय के साथ बढ़ती ही जा रही है. वैश्विक स्तर का कोरोना वायरस भी काशी के निरंतर बदलने की गति को भी नहीं रोक पा रही है.

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गंगा किनारे पर बसी काशी धाम का इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है. भगवान शिव के द्वारा बसाई गई और उनकी अत्यधिक प्रिय काशी धाम में आज वह सब कुछ है जो विश्व के बड़े-बड़े शहरों में भी देखने को नहीं मिलेगा. दुर्गाकुंड स्थित भगवान बुध का लाइट एंड साउंड शो हो या महादेव का प्राचीन विश्वनाथ मंदिर हो यहां समय के साथ ही लगातार धार्मिकता का रंग और अधिक गाढ़ा करता जा रहा है. पवित्र गंगा किनारे के घाट हो या प्राचीन काल के धरोहर सभी स्थानों पर धर्म अध्यात्म साहित्य संस्कृति व संगीत कला का अनूठा संगम केवल और केवल यहां पर ही देखने को मिलता है. विविधताओं में एकता के मूल मंत्र को अपनाकर यहां के लोग प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभाना अच्छी तरह से जानते हैं.

जब से काशी को प्रधानमंत्री संसदीय क्षेत्र का ओहदा प्राप्त हुआ है तब से यहां आधुनिकता के साथ प्राचीन धरोहरों को सजाने सवारने और उनको विकसित करने का जैसे एक दौर था चल निकला हो. इस क्रम में जहां वाराणसी महानगर में आधुनिक मशीनों के माध्यम से स्वच्छता अभियान को परवान चढ़ाया जा रहा है तो वही लमही के इंद्रेश आश्रम में त्रेता युग कालीन भगवान राम के जीवन से जुड़े अनेकों देव पुत्रों के मंदिरों निर्माण की श्रंखला का भी श्री गणेश हो चुका है. बाबा विश्वनाथ की इसे कृपा ही कहेंगे कि काशी धाम में आधुनिकता के समय के साथ साथ प्राचीनता का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है.

 

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