वाराणसी: पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं आज रखेंगी हरतालिका व्रत

Smart News Team, Last updated: 21/08/2020 07:54 AM IST
  • वाराणसी. कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की कामना के लिए रखती हैं हरतालिका व्रत हरतालिका तीज पर व्रती महिलाएं रखती है निर्जला व्रत आज यानी 21 अगस्त को मनाई जाएगी हरितालिका तीज
प्रतीकात्मक तस्वीर 

वाराणसी। अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं आज हरतालिका व्रत रखेंगी.

यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इसे तीज त्यौहार भी कहते हैं. महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की मनोकामना के लिए यह व्रत रखती हैं.

इस पर्व पर व्रती महिलाएं अन्न जल ग्रहण नहीं करती. यह निर्जला व्रत होता है.

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आचार्य व काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्र में इस व्रत के लिए सधवा व विधवा सबको आज्ञा है.

उन्होंने बताया कि विधि-विधान से पूजन अर्चन करने पर भगवान शिव व पार्वती प्रसन्न होते हैं. व्रती महिलाओं की सभी मनोकामनाओं को भगवान शिव पूर्ण करते हैं.

मां पार्वती को अर्पित होती है सुहाग सामग्री

हरतालिका तीज पर महिलाएं श्रृंगार के सभी सामग्रियों से मां पार्वती की पूजा करती हैं. इसके अलावा रात्रि में भजन कीर्तन भी किया जाता है. महिलाएं रात में जागरण करती हैं.

भगवान शिव व मां पार्वती की तीन बार आरती की जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव शंकर प्रसन्न होते हैं. हरितालिका तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व है. महिलाएं इस दिन हरी साड़ी पहनती है.

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनेऊ, कलेवा या लच्छा या नाड़ा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, फुलहरा और विशेष प्रकार की पत्तियां इनमें शामिल हैं.

इसके साथ ही लकड़ी का पाटा, लाल या पीले रंग का कपड़ा, पूजा के लिए नारियल, पानी से भरा कलश, माता के लिए चुनरी, सुहाग का सामान, मेंहदी, काजल, सिंदूर, चूडिय़ां, बिंदी और पंचामृत भी आवश्यक सामाग्रियों में शामिल हैं.

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