बुनकरों की 15 अक्टूबर से चल रही है हड़ताल, बनारसी उद्योग हो रहा है कंगाल

Smart News Team, Last updated: Wed, 28th Oct 2020, 10:35 PM IST
  • सस्ती बिजली की मांग को लेकर गत 15 अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल के साथ सड़कों पर उतरे बुनकरों के काम ना करने के चलते काशी के बनारसी साड़ी उद्योग को झटका लगा है. 13 दिन से लगातार चली आ रही हड़ताल ने बनारसी उद्योग को 300 करोड़ों रुपए का फटका दिया है.
15 अक्टूबर से चल रही बुनकरों की हड़ताल

वाराणसी. बताते चलें कि हाल ही में शासन की ओर से बनारस में बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं. बिजली की दर वृद्धि के दायरे में बनारसी वस्त्र उद्योग से जुड़े बुनकर भी आ गए हैं. पहले जहां बुनकरों को अपने उद्योग के लिए घरेलू बिजली की दर से अपना बिल जमा करते थे करते थे. बिजली वृद्धि के आदेश के बाद अब बुनकरों को कमर्शियल कैटिगरी के तहत रखा गया है.

इसी बात को लेकर बनारसी वस्त्र उद्योग से जुड़े काशी के बुनकरों नाराज हैं. पहले की ही तरह बिजली की दरें लागू करने की मांग को लेकर बनारस के बुनकर गत 15 अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल पर हैं. हड़ताल को 13 दिन बीत चुके हैं. बुनकरों के काम ना करने के कारण बनारसी वस्त्र उद्योग को बड़ा झटका लगा है. हड़ताल के इन 13 दिनों में बनारसी वस्त्र के खरीदारों के 300 करोड़ रुपए के आर्डर निरस्त हो चुके हैं. बुनकरों की चल रही हड़ताल को लेकर सरकार भी जिद पर अड़ी हुई है. 

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अभी तक इस मसले का हल नहीं निकाला जा सका है. बनारसी वस्त्रों के खरीदार माल न मिलने के कारण सूरत बैंगलोर व अन्य शहरों की ओर रुख करने लगे हैं. वही हड़ताल के चलते बंद हुए आय के स्रोत के कारण बुनकरों की हालत भी दिन-ब-दिन पतली होती जा रही है. जल्द ही इस और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बुनकरों के भी पलायन करने की संभावना बढ़ जाएगी. इससे काशी का प्राचीन बनारसी वस्त्र उद्योग के भी संकट के घेरे में आने की संभावना है.

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