वाराणसी : इस एकादशी पर करें भगवान विष्णु की आराधना संतान की होगी इच्छापूर्ति

Smart News Team, Last updated: Fri, 22nd Jan 2021, 11:39 AM IST
  • शनिवार को हिंदू पंचांग के तहत लगने वाली एकादशी की तिथि संतान प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले जातकों के लिए बेहद खास है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से आराधना करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है.
इस एकादशी पर करें भगवान विष्णु की आराधना

वाराणसी : काशी के नामचीन ज्योतिषाचार्य विमल जैन बताते हैं कि शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 जनवरी यानी शनिवार की रात्रि 8:57 पर लग रही है जो 24 जनवरी रविवार की रात्रि 10:58 तक रहेगी. इस बार एकादशी का व्रत 24 जनवरी को रखना ही पंचांग के अनुसार शुभ मानी गई है. उन्होंने बताया कि वैसे तो भारतीय संस्कृति के हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक माह की तिथियां अपना खास महत्व सकती हैं किंतु इस बार की एकादशी का विशेष महत्व है. 

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी के रूप में भी माना जाता है. इस दिन विधि विधान से भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा अर्चना करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख का लाभ मिलता है. उन्होंने बताया कि पुत्रदा एकादशी व्रत का संकल्प लेकर शनिवार की रात्रि को भगवान विष्णु को याद कर निद्रा लें. रविवार की सुबह स्नान आदि करके एकादशी का व्रत रखकर भगवान श्री विष्णु की पूजा अर्चना के बाद उनकी महिमा में श्री विष्णु सहस्त्रनाम श्री पुरुष सूक्त का पाठ करना चाहिए. 

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बताया कि व्रत के दौरान जातक ओम श्री विष्णवे नमः और ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का अधिक से अधिक संख्या में जाप करें. सोमवार को व्रत का समापन करें. एकादशी व्रत के दौरान जातक दूधिया फलाहार ग्रहण कर सकते हैं. सच्ची निष्ठा और श्रद्धा से व्रत करने वालों को भगवान श्री विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके सभी मनोरथ सफल होते हैं उन्हें संतान सुख की भी प्राप्त होती है. 

पौराणिक मान्यता है कि प्राचीन नगरी भद्रावती के राजा बसु केतु को संतान नहीं हो रही थी तब उन्होंने एकादशी का व्रत रखकर भगवान श्री विष्णु की मनोयोग से उपासना की इससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई इसी व्रत की वजह से पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को पुत्तराज एकादशी कहा जाता है.

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